सकारात्मक कैसे सोचें

Life management basics

कैसे सकारात्मक सोचें

सकारात्मक सोच रखना एक विकल्प है। आप ऐसे विचार सोच सकते हैं या मन में ला सकते हैं जो आपके मूड को ठीक कर देता है, जो कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए रोशनी की राह दिखाएं, और आपके जीवन में खुशियों के रंग भर दें, जो कार्य हम कर रहे हैं, उसमें सफल होने के लिए उम्मीद भरा दृष्टिकोण प्रदान करें। जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखने से, आप अपने मन को नकारात्मक सोच के दायरे से बाहर लाने की शुरूआत कर सकते हैं और आप देखेंगे की आपका जीवन परेशानी और बाधाओं के बजाय संभावना और उपाय से परिपूर्ण हो जाएगा। अगर आप जानना चाहते हैं कि कैसे ज्यादा सकारात्मक सोच रखना है, तो नीचे दिए गए सलाह का अनुसरण करें।

विधि 1:
अपनी सोच का आकलन करन।
1
अपने रवैये के प्रति जिम्मेदारी उठाएं: आप अपने विचारों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होते हैं; और जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण आप चुन सकते हैं।[१] अगर आप नकारात्मक ढंग से सोचते हैं, तो आपने खुद इस तरीके को चुना है। अभ्यास के साथ, आप अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने का प्रयास कर सकते हैं।

2
सकारात्मक सोचने से होने वाले फायदे के बारे में जाने: सकारात्मक सोच रखने से आपको न केवल अपने जीवन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, बल्कि अपने रोजमर्रा के अनुभवों को भी आप ज्यादा सुखद बना पाते हैं, और इसके अलावा आपको अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद मिलती है, और किसी भी बदलाव के साथ खुद को बदलने में भी सक्षम बनने में भी आपको मदद मिलेगी। इन अत्यधिक मिलने वाले लाभों को जानने के बाद आपको नियमित रूप से सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित होने में मदद मिल सकती है।[३] सकारात्मक सोच रखने के कुछ फायदे हैं:
आपके जीवन अवधि में वृद्धि होना
उदासी और परेशानी कम होना
साधारण ठंड से निपटने में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होना
बेहतर मानसिक और शारीरिक स्थिति
तनाव की स्थिति में उससे बेहतर तरीके से निपटने की क्षमता रखना
कोई भी रिश्ता बनाने में और उसे मजबूती से कायम रखने में प्राकृतिक क्षमता होना

3
अपने विचार दर्शाने के लिए एक डायरी अपने पास रखें: अपने विचारों को डायरी में लिखने से, आप फिर से एक बार अपनी सोच पर विचार करके, उनके तरीकों में बदलाव लाने में सक्षम हो सकते हैं। अपने विचारों और भावनाओं को लिखिए और सकारात्मक या नकारात्मक विचार के कारणों को जानने की कोशिश करें। दिन के अंत में 20 मिनट का समय निकालकर अपने लिखे हुए सोच के तरीकों को पढ़ने से आपको नकारात्मक विचारों को पहचानने में मदद मिल सकती है और आप उन नकारात्मक विचारों को सकारात्मक बनाने के लिए पर्याप्त योजना बना सकते हैं।
आप अपने मनपसंद तरीके से डायरी में अपनी सोच के बारे में लिख सकते हैं। अगर आपको लंबे चौड़े विचार संबंधित पैराग्राफ लिखने में कोई आपत्ति नहीं है, तो आप सिर्फ उस दिन के कोई भी पांच प्रबल नकारात्मक और सकारात्मक विचार के बारे में लिख सकते हैं।
ध्यान रखें कि अपने डायरी में दर्शाए गए विचारों को आंकने के लिए खुद को समय और अवसर दें। अगर आप अपने विचार रोज लिखते हैं, तो सप्ताह के अंत में अपने दर्शाए गए विचारों को आप आंक सकते हैं।

*नकारात्मक सोच को पहचाने*

1
मन में अपने आप आने वाली (automatic) नकारात्मक सोच को पहचानें: नकारात्मक विचार जो आपको हमेशा पीछे खिंचने लगते हैं, उन्हें सकारात्मक विचारों से बदलने के लिए, आपको “अपने आप आने वाले नकारात्मक सोच“ के बारे में जागरूक होने की जरूरत है। जब आप इन विचारों को पहचान जाएंगे, तो आप उन्हें चुनौती दे सकते हैं और इन विचारों को अपने दिमाग से बाहर निकालने के आदेश दे सकते हैं।[४][५]
जब आप आने वाले परीक्षा के बारे में सुनते हैं, और आप सोचने लगते हैं, “शायद मैं इस परीक्षा में फेल हो जाऊंगा,” तो यह अपने आप आने वाली नकारात्मक सोच का उदाहरण है। यह विचार आटोमैटिक है, क्योंकि परीक्षा के बारे में सुनते ही यह आपकी प्रारंभिक प्रतिक्रिया है।

2
अपने नकारात्मक विचारो को चुनौती दें: अगर आपने अपने जीवन का अधिकतर समय नकारात्मक तरीके से सोचने में बिताया है, तो आपको इस नकारात्मक सोच को जारी रखने की जरूरत नहीं है। जब भी आपके मन में नकारात्मक सोच आए, खासकर आटोमैटिक नकारात्मक विचार, तो उन्हें आने से रोकें और उन विचारों का आकलन भी करें[६] कि यह विचार सही और यथार्थ है या नहीं।[७]
वास्तविक बनकर नकारात्मक विचारों को आप चुनौती दे सकते हैं। अपने नकारात्मक विचारों को लिखें और सोचे कि अगर यही विचार कोई और आपसे कहता तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होती। यह संभव है कि आप दूसरों की नकारात्मकता का खंडन करने कि कोशिश करेंगे, जो खुद के लिए करना आपके लिए मुश्किल लगता है।[८]
उदाहरण के लिए, आपका नकारात्मक विचार “मैं हमेशा परीक्षा में फेल होता हूँ,” हो सकता है। अगर आप हमेशा परीक्षा में फेल होते, तो आप अभी तक स्कूल में नहीं होते। अपने फाइल या ग्रेड फिर से देखें और ऐसे परीक्षा के फल देखें जिसमें आप पास हुए है; यह नकारात्मक विचार को चुनौती देते हैं। आप यह भी देख सकेंगे कि कुछ परीक्षाओं में आपको A या B ग्रेड मिला है, जो पुष्टि करता है कि आप अपने बारे में कुछ ज्यादा ही नकारात्मक सोच रहे हैं।

3
अपने नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच से बदल दें: जब आपको खुद पर भरोसा हो जाएगा कि आप नकारात्मक विचारों को पहचानकर चुनौती दे सकते हैं, तब आप अपने नकारात्मक विचारों को अपने मुताबिक सकारात्मक विचारों में बदलने के लिए तैयार हो जाएंगे।[९] इसका मतलब यह नहीं है कि जो भी आपके जीवन में होता है, वह सकारात्मक ही हो; यह सामान्य बात है कि हमारे जीवन में हर तरह की भावनाएं होती है। हालांकि, आप रोजमर्रा के बेकार विचारों के पैटर्न को जीवन को संवारने वाले विचारों से बदल दें।
उदाहरण के लिए, अगर आपके मन में यह विचार आता है कि, “मैं शायद परीक्षा में फेल हो जाऊंगा,” तो खुद को रोकें। आप जान चुके होंगे कि यह विचार नकारात्मक है, और इन विचारों की सत्यता को आंकते है। अब आप इस नकारात्मक विचार को सकारात्मक विचार से बदलने की कोशिश करें। सकारात्मक होना मतलब आँख मूंद कर आशावादी होना नहीं है, जैसे ऐसा सोचना कि, “बिना पढ़े, मुझे इस परीक्षा में 100 में से 100 अंक मिलेंगे।“ परंतु आप इसे ऐसा सोच सकते हैं कि, “मैं परीक्षा के लिए तैयारी करने में समय दूंगा और मन लगाकर पढ़ाई करूंगा, ताकि मैं परीक्षा में अच्छे से कर सकूं।“
प्रश्नों की ताकत का प्रयोग करें। जब आप कुछ सवाल करते है, तो आपका दिमाग आपके सवाल का जवाब ढूंढने में लग जाता है। अगर आप यह प्रश्न करते हैं कि, “जीवन इतना भयानक क्यों है?” तो आपका दिमाग इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करेगा। यह भी सच है अगर आप यह प्रश्न करते हैं कि, “मैं बहुत भाग्यशाली कैसे हो सकता हूँ?” अपने आप से ऐसे सवाल करें जो आपको सकारात्मक सोच की तरफ आकर्षित करता है।

4
आपके नकारत्मकता को उकसाने वाले बाहरी प्रभावों को कम करें: आप यह देख सकते हैं कि कुछ प्रकार के संगीत या हिंसक वीडियो गेम या सिनेमा आपके संपूर्ण रवैये को प्रभावित कर देते हैं।[१०] ऐसे तनावपूर्ण और हिंसक उत्तेजना के प्रति अपना प्रदर्शन कम करें और ज्यादातर शांत संगीत सुनने में या अच्छी किताबें पढ़ने में अपना समय बिताएं। संगीत आपके मन को शांत रखने में लाभकारी है और सकारात्मक सोच पर आधारित किताबें पढ़ने से आपको एक खुशनुमा इंसान बनने में मदद मिल सकती है।

5
”है या नहीं वाली सोच” से बचें: इस तरह की सोच में, जो “विपरीत सोच (polarizing)” के नाम से भी जाना जाता है, आप जिसका भी सामना करते हैं वह या तो “है” या “नहीं है” के रूप में होती है; इसके अलावा आप कोई दूसरे विकल्प नहीं सोचते। इस विचार के कारण लोग महसूस करने लगेंगे कि जो कुछ वह करेंगे उसे बखूबी से करेंगे या करेंगे ही नहीं।[११]
इस तरह की सोच से बचने के लिए, बीच वाली सोच (है या नहीं वाली सोच के बीच वाली सोच) को अपनाएं। दो परिणामों के संदर्भ में सोचने के बजाय (सकारात्मक और नकारात्मक), इन दो परिणामों के बीच आने वाले सभी परिणामों की सूची बनाएं, ताकि आप देख सकेंगे जो बातें गंभीर दिख रही है, वह असल में गंभीर नहीं है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी परीक्षा नजदीक आ रही है और विषय के बारे में सहज महसूस नहीं करते हैं, परीक्षा न देने की सोच सकते हैं या परीक्षा के लिए बिलकुल तैयारी नहीं करते हैं, अगर आप फेल होते है, तो इसका कारण है, कि आपने बिलकुल कोशिश ही नहीं की है। हालांकि, यह अनदेखा करने वाला तथ्य है कि अगर आप परीक्षा की तैयारी के लिए समय देते तो शायद परीक्षा में पास होने की संभावना होती।
परीक्षा जो आप देने वाले है उस परीक्षा का ग्रेड A या F है, इस सोच से आपको बचना चाहिए। और A और F ग्रेड के “बीच” बहुत से ग्रेड होते है जिस पर आप विचार कर सकते हैं।

6
बातों को ”व्यक्तिगत रूप” देना टालें: हर बात को व्यक्तिगत रूप देने से यह मान लिया जाता है कि जो कुछ भी गलत हो रहा है उसके जिम्मेदार आप खुद है। अगर इस तरह की सोच आप लंबे समय तक रखते हैं, तो आप पागलपन के शिकार हो सकते हैं, और सोचने लगते हैं कि कोई आपको पसंद नहीं करता है या कोई भी आपके साथ घूमने जाना पसंद नहीं करता है, और हर एक छोटी बात जो आप करते हैं वह किसी दूसरे व्यक्ति को निराश करती है।[१२]
कोई व्यक्ति, जो हर बात को व्यक्तिगत रूप से लेता है, शायद सोचता है, “रूबी आज सबेरे मुझे देखकर मुस्कराई नहीं थी। शायद मैंने कुछ ऐसा किया होगा जिससे वह नाराज़ है।” हालांकि, यह भी संभावना है कि रूबी का दिन बुरा रहा है और उसके मूड से आपका काई संबंध नहीं है।

7
परिस्थिति के ”एक पहलू के बारे में सोचना” टालें: आप यह तब करेंगे जब आप केवल किसी परिस्थिति के नकारात्मक पक्ष को सुनने के लिए चुनते हैं। हर परिस्थिति के दो तत्व होते हैं, जो या तो अच्छे होते हैं या बुरे, और यह दोनों परिस्थिति को पहचानने में मदद करते हैं। अगर आप इस तरह सोचेंगे, तो आप किसी भी परिस्थिति के बारे में सकारात्मक नहीं सोच पाएंगे।[१३]
उदाहरण को लिए, अगर आपने कोई परीक्षा दी है, और उसमें आपको C ग्रेड मिला है, और उसके साथ आपको अपने शिक्षक से फीडबैक मिला है कि पिछले परीक्षा के मुकाबले इस बार आपने अत्यंत प्रगति की है। तो इस परिस्थिति में अगर आप सिर्फ एक ही पहलू के बारे में सोच रहे हैं कि आपको परीक्षा में C ग्रेड मिला है, तो आप सिर्फ नकारात्मक सोच रहे हैं और इस हकीकत को अनदेखा कर रहे हैं कि पिछले बार के मुकाबले आपने इस बार प्रगति और उन्नति प्राप्त की है।

8
”विनाशकारी सोच” से बचें: यह सोच तब आती है, जब आप मान लेते है कि किसी भी बात का सबसे खराब नतीजा निकलने वाला है।[१४] विनाशकारी सोच हमेशा आपके खराब प्रदर्शन की चिंता से संबंधित है। आप किसी भी संभावित परिणामों के बारे में वास्तववादी होने के साथ इस विनाशकारी सोच का विरोध कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, शायद आप सोच सकते हैं कि जिस परीक्षा के लिए आप तैयारी कर रहे हैं उसमें आप फेल हो जाएंगे। विनाशकारी सोच से असुरक्षित भावना इतनी बढ़ जाएगी कि आप मानने लगेंगे कि आप कक्षा में फेल हो जाएंगे और फिर कॉलेज में ड्राप आउट हो जाएंगे, फिर आपको कहीं नौकरी नहीं मिलेगी और आपका कभी कल्याण नहीं हो सकता है। अगर आप नकारात्मक सोच को वास्तविकता से सोचते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि एक मात्र परीक्षा में फेल होने से यह जरूरी नहीं है कि आप पूरे कोर्स में ही फेल हो जाएंगे, और आपको कॉलेज से ड्राप आउट होने की जरूरत नहीं होगी।

9
शांत जगह घूमने जाएं: इससे आपको भगदड़ से बचने में मदद मिल सकती है, जब आपको अपने रवैये को बदलने की जरूरत होती है। अधिकांश लोग यह महसूस करते हैं कि कहीं बाहर थोड़ी देर समय व्यतीत करने पर मूड बेहतर हो जाता है।
अगर आपकी कार्य की जगह पर खुली हवा वाला क्षेत्र है जहां बेंच या पिकनिक के टेबल लगे हैं, तो अपने व्यस्त समय में से थोड़ा समय निकालकर खुली हवा में आइए और तरोताजा महसूस करें।
अगर आप बाहर शांत जगह जाने से असमर्थ हैं, तो ध्यानमग्न हो जाएं और मन में कल्पना करें कि आप सही मौसम में खुली हवा में सुखद अनुभव कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *