Yog kyo karte hain.?

द्वैत और आनंद

क्यों करते हैं योग ?

सुख और दुःख हमेशा मौजूद रहते हैं इस सिद्धांत को ही द्वैत सिद्धांत कहते हैं।
दिन है तो रात भी है
अँधेरा है उजाला भी है
लड़का है लड़की भी है
आगे है पीछे भी है।
बड़ा है छोटा भी है।
तो जो है दो है
जोड़ा में है
अकेला नहीं है
सुख का जोड़ा दुःख है
आप दुःख नहीं चाहते हैं
सुख ही चाहते हैं
पर जब सुख मिलेगा उतना दुःख भी आगे मिलेगा
तो ये आप तो नहीं चाहते हैं

कितना अच्छा हो की आप इस सिस्टम से बाहर आ जाएं

जब आप इस सिस्टम से बाहर आएंगे तो न आपको सुख मिलेगा न दुःख मिलेगा

तो क्या मिलेगा
आपको आनंद मिलेगा
परम आनंद
सुख और दुःख से आगे की बात है आनंद
जो इसे एक बार पाता है कोई और चिज नहीं पाना चाहता है
ये एक ऐसी फीलिंग है जो बताया नहीं जा सकता है
रात को सोते समय आप इसकी हलकी सी झलक पाते हैं
और आप रिलैक्स महसूस करते हैं।
आप उस आनंद की अवस्था से थोड़ा सा जुड़ते हैं तो इतना रिलैक्स मिलता है
अगर उस अवस्था से पूरी तरह जुड़ जाएंगे तो संपूर्ण आनंद मिलेगा

ये आनंद स्थाई होगा।

फिर सुख दुख आपको तंग नहीं करंगे

उस सिस्टम से जुड़ने के लिए आप योग करते हैं
योग आनंद के लिए करते हैं
स्थाई आनंद के लिए
अगर आपको आनंद नहीं आ रहा है योग करने में तो आप कही न कही गलती कर रहे हैं।
सवाल पूछिये फिर की आनंद क्यों नहीं आ रहा है।
आप जो काम करते हैं अगर उसमे आपको आनंद आ रहा है तो उसे करते रहिए और आनंद महसूस करिये।

इसे कर्मयोग कहते हैं।

अगर पढ़ते हुए ही आनंद आने लगे तो समझिए की आप ज्ञान योग कर रहे हैं।

अगर अपनी सत्ता अहम् अहंकार का नाश होने से आपको आनंद आ रहा है तो आप भक्तियोग कर रहे हैं।

आनंद को खोजिये
यही जीवन का उद्देश्य है
लक्ष्य को प्राप्त करने में आनंद मिलता है
तो आप आनंद प्राप्त करने को लक्ष्य को प्राप्त करिये
मूल बात है सुख और दुःख से आगे की स्थायी कोई चीज है
तो आनंद है

योग उसे प्राप्त करने का तरीका है।

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